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Showing posts from September, 2018

सिर्फ तर्क करने वाला दिमाग एक ऐसे चाक़ू की तरह है जिसमे सिर्फ ब्लेड है।  यह इसका प्रयोग करने वाले के हाथ से खून निकाल देता है। 

हम जब कोई भी फ़ैसला लेते हैं, किसी नतीजे पर पहुंचते हैं तो उससे पहले हमारे दिमाग में द्वंद्व चल रहा होता है- सहज बोध और तार्किकता के बीच. इस द्वंद्व में जिसकी जीत होती है, हमारा ...