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सिर्फ तर्क करने वाला दिमाग एक ऐसे चाक़ू की तरह है जिसमे सिर्फ ब्लेड है।  यह इसका प्रयोग करने वाले के हाथ से खून निकाल देता है। 

हम जब कोई भी फ़ैसला लेते हैं, किसी नतीजे पर पहुंचते हैं तो उससे पहले हमारे दिमाग में द्वंद्व चल रहा होता है- सहज बोध और तार्किकता के बीच. इस द्वंद्व में जिसकी जीत होती है, हमारा ...